भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। उन्होंने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करके इसकी जानकारी दी।
खास बात यह है कि 13 साल पहले 6 नवंबर को उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था और इसी दिन टेस्ट छोड़ा। उन्होंने 64 मैच में 229 विकेट लिए। हालांकि, वे वनडे और टी-20 क्रिकेट खेलते रहेंगे।
36 साल के शमी ने लिखा, आज भारी मन और अनगिनत खूबसूरत यादों के साथ टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर रहा हूं।
पहली बार भारत की टेस्ट जर्सी पहनी थी, तब सिर्फ एक सपना था- देश के लिए कुछ कर दिखाना। हर विकेट, संघर्ष, चोट और वापसी ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया।
बोले- सफेद जर्सी छोड़ रहा हूं, क्रिकेट नहीं
शमी ने साफ किया कि वे IPL और घरेलू क्रिकेट सहित व्हाइट बॉल फॉर्मेट खेलते रहेंगे। जरूरत पड़ने पर फिटनेस बनाए रखने के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट के चार दिवसीय मैच भी खेल सकते हैं, लेकिन भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलेंगे।
उन्होंने कहा, टेस्ट क्रिकेट मेरे लिए सिर्फ एक फॉर्मेट नहीं, मेरी जिंदगी का बेहद खास हिस्सा रहा है। मैदान पर मेरी आखिरी टेस्ट गेंद भले ही फेंकी जा चुकी है, लेकिन भारत के लिए खेलने का गर्व हमेशा मेरे दिल में रहेगा।
शमी ने डेब्यू मैच में 9 विकेट लिए थे
शमी ने 6 नवंबर 2013 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहला टेस्ट खेला था। डेब्यू मैच में ही उन्होंने कुल 9 विकेट लिए।
वे 6 बार एक पारी में 5 या उससे ज्यादा विकेट लेने में सफल रहे। एक पारी में उनका बेस्ट प्रदर्शन 56 रन देकर 6 विकेट रहा। कुल टेस्ट विकेटों के मामले में वे भारत के गेंदबाजों में 12वें और तेज गेंदबाजों में छठे स्थान पर रहे।
वर्ल्ड कप के बाद चोटों से जूझे, टीम में वापसी नहीं हुई
2023 वनडे वर्ल्ड कप में शमी भारत के सबसे सफल गेंदबाजों में रहे थे। इसके बाद टखने की चोट के कारण उन्हें सर्जरी करानी पड़ी। घुटने की परेशानी ने भी वापसी में समय लिया। जनवरी 2025 में उन्होंने टी-20 क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय वापसी की और फिर चैंपियंस ट्रॉफी की टीम में चुने गए। न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच रहा।
इसके बाद वे भारतीय टीम के लिए किसी भी फॉर्मेट में नहीं खेले, लेकिन घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से लगातार खेलते रहे। हाल ही में रणजी ट्रॉफी के शुरुआती मैच में दिल्ली के खिलाफ उन्होंने 5 विकेट भी लिए। इसके बावजूद न्यूजीलैंड दौरे से पहले होने वाले चार दिवसीय मैचों के लिए भारत-A टीम में उन्हें जगह नहीं मिली। सीनियर टीम की टेस्ट योजनाओं में भी उनका नाम नहीं था।
संन्यास से करीब दो सप्ताह पहले बंगाल के लिए खेलते हुए शमी ने अपनी फिटनेस पर सवालों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था, मैं अभी अपने चरम पर हूं। इसमें घुमा-फिराकर कहने की जरूरत नहीं है।
शमी का गांव से टीम इंडिया तक का सफर
मोहम्मद शमी का जन्म 3 सितंबर 1990 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के सहसपुर अलीनगर गांव में हुआ। उनके पिता तौसीफ अली किसान थे और खुद भी तेज गेंदबाजी करते थे। उन्होंने बेटे की प्रतिभा पहचानी और उसे क्रिकेट की ट्रेनिंग दिलाने के लिए मुरादाबाद के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी के पास भेजा।
उत्तर प्रदेश की अंडर-19 टीम में जगह नहीं मिलने के बाद कोच की सलाह पर शमी कोलकाता चले गए। वहां उन्होंने क्लब क्रिकेट खेला और बंगाल की टीम में जगह बनाई। घरेलू क्रिकेट में तेज गेंदबाजी से पहचान बनाने के बाद 2013 में उन्हें भारतीय टीम में मौका मिला।
शमी ने IPL में भी अपनी पहचान बनाई। शमी ने 2023 सीजन में गुजरात टाइटन्स की ओर से खेलते हुए 17 मैचों में 28 विकेट लेकर पर्पल कैप जीता था। पर्पल कैप IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज की दिया जाता है।