स्कूल संचालक एवं पुस्तक विक्रेता की सांट गांठ शिक्षा बनी पैसों का जरिया?
संजय अग्रवाल // हरदा जिले में स्कूलों और बुक विक्रेताओं की मिलीभगत का एक और मामला सामने आया है, जहां छात्रों और अभिभावकों को किताबों के साथ जबरदस्ती कॉपियां भी खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यदि कोई अभिभावक कॉपी लेने से मना करता है, तो उसे किताबें देने से भी साफ इनकार कर दिया जाता है। अभिभावकों का आरोप है कि यह एक सुनियोजित लूट का तरीका बन चुका है, जिसमें जरूरत से ज्यादा और महंगी कॉपियां थोप दी जाती हैं। कई लोगों ने बताया कि वे सिर्फ निर्धारित किताबें खरीदना चाहते थे, लेकिन दुकानदारों ने “पूरा सेट” लेने की शर्त रख दी।
इस जबरदस्ती के चलते गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की मनमानी न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि अभिभावकों के अधिकारों का भी हनन है।
शिक्षा विभाग और प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े करती है। आखिर कब तक इस तरह की खुली लूट जारी रहेगी? अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह प्रथा और भी विकराल रूप ले सकती है, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब और बच्चों की शिक्षा पर पड़ेगा।