शिक्षा के नाम पर चल रहा है कमीशन का खेल अभिभावक परेशान?
संजय अग्रवाल // नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही हरदा जिले में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले के कई निजी स्कूलों में किताबों और कॉपियों के नाम पर अभिभावकों से जमकर वसूली की जा रही है।आरोप है कि यह सब जिला शिक्षा अधिकारी देवेंद्र रघुवंशी की सांट गांठ या कहें मौन सहमति—के चलते खुलेआम चल रहा है।
जानकारी के अनुसार संपूर्ण हरदा जिला स्कूल संचालक अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इन दुकानों पर किताबों के दाम बाजार दर से काफी अधिक वसूले जा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि यदि वे बाहर से पुस्तक खरीदना चाहते हैं तो बुक मार्केट में नहीं मिलती क्योंकि स्कूल संचालक कुछ दुकानों पर ही अपनी स्कूल की बुके बिकबा रहे हैं? कहीं-कहीं तो यह स्थिति है कि यदि गलती से मार्केट में पुस्तके मिल भी गई तो स्कूल प्रबंधन साफ मना कर देता है। सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग, स्कूल संचालकों और किताब विक्रेताओं के बीच सांठ-गांठ है, और इस गठजोड़ को शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मौन संरक्षण भी प्राप्त है। यही कारण है कि हर साल शिकायतों के बावजूद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आती है। अभिभावकों में इस व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई के नाम पर हर साल इस तरह की लूट की जाती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहते हैं। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर इसका सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या हरदा के कलेक्टर सिद्धार्थ जैन इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच करेंगे या फिर हर साल की तरह इस बार भी यह खेल यूं ही चलता रहेगा? फिलहाल अभिभावक न्याय और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, लेकिन व्यवस्था की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।