बहुत सही महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार।

 


अबकी बार मोदी सरकार पेट्रोल 100 के पार


2014 के लोकसभा चुनाव के पहले जो आज के प्रधानमंत्री हैं अपनी हर जगह चुनावी रैली में और सभाओं में कहा था की की बहुत सही महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार।

शनिवार को पांचवें दिन दिन भी पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। आज पेट्रोल 30 पैसे और डीजल 36 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। कीमतों में आई तेजी के बाद मुंबई में पेट्रोल 95 रुपए प्रति लीटर के लगभग पहुंच गया है। दिल्ली में पेट्रोल 88.41 रुपए/लीटर और डीजल 78.74 रु./लीटर हो गया है।मुंबई में इन ईंधनों के भाव बढ़ कर क्रमश: 94.93 रुपए और 85.70 रुपए प्रति लीटर के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। राज्यों में वैट और अन्य शुल्कों की अलग अलग दरों से पेट्रोलियम उत्पादों के स्थानीय भाव में अंतर होता है।



आज कच्चे तेल की कीमत लगभग तीन गुना ज्यादा पैसा वसूला जा रहा है इसमें केंद्र राज्य सरकारें और डीलरशिप शामिल है। पेट्रोल की कीमत लगभग ₹100 रुपए छूने की लालसा है। यहां पर यह बताना बहुत ही जरूरी है कि मनमोहन सरकार को घेरने के लिए यही बीजेपी वाले पेट्रोल और डीजल की कीमत को लेकर के बहुत हो हल्ला मचाया था। आज जब कीमत ₹100 है उसके बाद भी भक्तों के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा है। 

आज पेट्रोल, डीजल,और रसोई गैस आम आदमी की दिनचर्या में शामिल हो गया है। बगैर इसके आदमी की जिंदगी शून्य के बराबर हो गई है। ऐसे में यदि पेट्रोल डीजल और गैस के दाम बढ़ते हैं तो महंगाई बढ़ना लगभग तय ही है, जिसका आम आदमी पर असर पड़ता है। यहां पर यह बता दें कि पैसे वालों पर  कोई खास असर नहीं पड़ता है। क्योंकि उनके पास अथाह संपत्ति होती है, लेकिन जो आदमी दिन भर हाड़ तोड़ मेहनत करता है उसके बाद शाम को उसके घर चूल्हा जलने की नौबत आती है ‌। इस तरह गरीबों की आए दिन पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ा कर कमर तोड़ने का काम किया जा रहा है।

हमारी मीडिया महंगाई को लेकर मौन धारण किए हुए हैं। यहां पर पूरी जनता को मालूम है कि हमारे देश में बेरोजगारी चरम पर है लेकिन मीडिया में महंगाई और बेरोजगारी भ्रष्टाचार पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। एक बच्चे को बीटेक,एमटेक कराने के लिए कम से कम ₹10 लाख रुपए लगते हैं जो आम आदमी के दायरे से बाहर है। यदि कोई अपने बच्चे को पढ़ाना भी चाहता है तो वह बैंक से कर्ज लेकर बच्चे के पढ़ाई कराता है ,लेकिन जब बच्चा डिग्री लेकर बाहर आता है उसको 10 हजार की नौकरी नहीं मिलती है। तब समस्या और विकराल हो जाती है। उधर बैंक की किस्त शुरू हो जाती है। यह मार रोज कमाने खाने वाले गरीब पर पड़ती है। कांग्रेस सरकार में शुल्क प्रतिपूर्ति योजना चलाई गई थी कि गरीब का बेटा भी बगैर पैसे के डॉक्टर इंजीनियर बन जाए, लेकिन बीजेपी सरकार ने उस पर भी कैंची चला दी।बीटेक की फीस चाहे जितनी जमा करें लेकिन मिलेगे 50,000 ही और सबसे बड़ी समस्या तब आ जाती हैं जब पात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति के  ₹50000 भी नहीं मिलते हैं। इसीलिए आज ऊंच-नीच की खाई बढ़ती ही जा रही है। गरीब और गरीब होता चला जा रहा है। 

आप सबको मालूम है कि अभी  जनता कोरोना के चलते लाकडाउन की समस्या से उबर कर अपनी दिनचर्या में नहीं आ पाई है। इस बीच काफी लोगों का रोजी-रोजगार चला गया है। अब महंगाई की मार से उनके घर चूल्हा जलना एक कठिन काम हो गया है।

 उधर पूरे देश के किसान 3 नए कृषि कानूनों को लेकर लगभग 3 माह पूरे होने को हैं तब से  दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं । किसानों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ हमारी नहीं है पूरे देश के गरीब असहाय लोगों की है।

यदि यह 3 नए कृषि कानून वापस नहीं होते हैं तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों को 1 किलो गेहूं की कीमत ₹200 से ज्यादा चुकानी पड़ेगी। उस समय देश में भुखमरी और बढ़ जाएगी।इसीलिए किसान आज आंदोलन कर रहा है कि एमएसपी पर गारंटी वाला कानून बनाया जाए और तीनों नए कृषि कानून वापस लिए जाएं जिससे देश को भुखमरी से बचाया जा सके। 

उधर नौकरी की आस लगाए दिन रात मेहनत करने वाले विद्यार्थियों ने निराशा की भावना पैदा हो रही है इनका मानना है कि जब सरकार सब कुछ प्राइवेट हाथों में कर देगी तो हम लोग आईटीआई पॉलिटेक्निक बीटेक एमटेक एमबीबीएस की डिग्री लेकर क्या करेंगे। क्योंकि इसके बाद भी निजी संस्थान हम डिग्री धारियों का शोषण करेंगे। उधर श्रम कानूनों मैं बदलाव को लेकर कर्मचारियों में रोष व्याप्त है उनका मानना है कि जब श्रम कानूनों में परिवर्तन कर दिया गया है उससे आम वर्कर प्रभावित हुआ है।संस्थान उनका शोषण करने लगे हैं और नौकरी से निकाल देने की धमकी भी दे रहे हैं।

पंउधर नौकरीपेशा वाले लोगों की आय में लगभग 220% इजाफा हुआ है जबकि किसान की आय मैं मात्र 20 फीसद ही बढ़ोतरी हो पाई है आज किसान की हालत वह है कि वह अपने बच्चे को ना ही पढ़ा सकता है और ना ही उनकी शादी बरात। यहां तक का किसान अपने बच्चे की शादी करने के लिए साहूकार या फिर बैंक से कर्ज लेते हैं जिसकी वह समय से अदायगी नहीं कर पाते हैं। कर्ज के बोझ तले दबकर किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाता है इसीलिए आज आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़ गई है।


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